
- Brand: Pravasi Prem Publishing India
- Language: Book
- Weight: 265.00g
- Dimensions: 21.00cm x 16.00cm x 2.00cm
- Page Count: 116
- ISBN: 978-81-989462-3-2
"सरफरोशी दिल में है, तो और सर
पैदा करो। नौजवानों हिंद में फिर से गदर पैदा करो।"
पंडित रामनारायण आज़ाद(02.09.1897 –
11.08.1947) भारत के महान क्रांतिकारी थे, जिनका
स्वतंत्रता संग्राम में एक अहम योगदान था। वह मुख्य रूप से फर्रुखाबाद (उत्तर
प्रदेश) से जुड़े हुए थे और उन्होंने इस क्षेत्र में क्रांति की ज्वाला भड़काई।
फर्रुखाबाद जिले में क्रांतिकारी गतिविधियों का नेतृत्व करने में उनका महत्वपूर्ण
योगदान था। उनका घर क्रांतिकारियों के लिए एक अड्डे के रूप में प्रसिद्ध था,
जहां ठहरने, खाने-पीने और महत्वपूर्ण रणनीतियां
बनाने का काम होता था।
ब्रिटिश खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, आज़ाद
क्रांतिकारियों को बम, पिस्तौल और गोला-बारूद की सप्लाई करते थे। वह
प्रसिद्ध क्रांतिकारियों जैसे राम प्रसाद बिस्मिल, चंद्रशेखर
आज़ाद और शचींद्रनाथ सान्याल के करीबी सहयोगी थे। कई मौकों पर, चंद्रशेखर
आज़ाद उनके घर पर रुके थे।
ब्रिटिश रिपोर्ट के अनुसार अनंत राम ,जगदीश ,
वैद्यनाथ ,चंद्रशेखर ,संत
कुमार पाण्डेय (फतेहपुर) आदि लोगों ने एक संगठन बनाया था -- 'रामनारायण आज़ाद
रिवॉल्यूशन ग्रुप', जिसमें लगभग 200 से अधिक
लोग जुड़े थे। क्रांति के लिए धन जुटाने हेतु आजाद जी
ने अपनी 29
दुकानें और नौ मकान बेच दिए थे।
क्रांतिकारी आंदोलन को सुचारु रूप से चलाने के
लिए, श्री
रामनारायण आजाद ने गंगा नदी के किनारे विश्रांत
घाट पर अपना ठिकाना बनाया जो
क्रांतिकारियों के गंगा पार करने और छिपने का एक महत्वपूर्ण ठिकाना बन गया था।
आजादी के मतवाले पंडित आजाद को स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान कई बार कठोर कारावास
हुआ, जिसकी शुरुआत 1912 में हुई थी और उन्होंने 1921,
1925, 1930, 1932 और 1942 में भी जेल की यात्रा की।
कितना दुर्भाग्य है कि देश की आज़ादी से ठीक 4
दिन पहले, यानी 11 अगस्त 1947
को पंडित जी को गोली मारकर शहीद कर दिया गया था।
